June 25, 2021

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Satyam Sarvada

संपादकीय : यूपी में योगी Vs मोदी, उथल पुथल के पीछे का सच

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चेहरा बदलने का आरंभ यूपी बीजेपी के ट्विटर अकाउंट से माेदी की फोटो हटाने से हाे चुका है। उत्तर प्रदेश में बैनर,पोस्टर व अन्य प्रचार सामग्री पर भी माेदी की तस्वीर नहीं हाेगी।

पिछले कुछ महीनों से उत्तर प्रदेश भाजपा में नेतृत्व में बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट चल रही है।

योगी आदित्यनाथ (अजय सिंह बिष्ट) सरकार पर ठाकुरवाद के आरोप, अंदरखाने में सुनाई पड़ रहे हैं।

अब चुनाव सन्निकट देख, कल 9 जून 2021 को कांग्रेस के कद्दावर ब्राह्मण युवा नेता जितिन प्रसाद को भारतीय जनता पार्टी में शामिल कर चुनावी युद्ध का आगाज कर दिया है।

ठाकुर बनाम ब्राह्मण के समीकरण को साधने की दिशा में भारतीय जनता पार्टी यह पहला कदम है। यह निश्चित बात है ब्राह्मण उत्तर प्रदेश मैं अपने आप को भारतीय जनता पार्टी से छिटका महसूस रहे थे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के बीच सब कुछ ठीक नहीं है।

कुछ दिन पहले तक अटकलें ही लगाई जा रही थीं लेकिन हाल में लिए गए कुछ फैसलों और घटनाओं से यह साबित हाे गया है कि अटकलों में दम है। आग ताे लगी है, तभी धुआं उठ रहा है।

एक फैसला हुआ है। फैसला कोई छोटा मोटा नहीं है। 2022 में उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा पीएम नरेंद्र मोदी के चेहरे का इस्तेमाल नहीं करेगी। माेदी प्रचार के लिए जाएंगे लेकिन चुनाव में किसी भी प्रचार सामग्री पर माेदी की फाेटाे नहीं लगाएगी जाएगी।

चेहरा बदलने का आरंभ यूपी बीजेपी के ट्विटर अकाउंट से माेदी की फोटो हटाने से हाे चुका है। उत्तर प्रदेश में बैनर,पोस्टर व अन्य प्रचार सामग्री पर भी माेदी की तस्वीर नहीं हाेगी।

प्रचार सामग्री पर प्रमुखता से योगी
आदित्यनाथ के साथ साथ प्रदेशाध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा की फोटो दिखाई देंगे।

साल के शुरुआती तीन महीनों में यूपी के साथ साथ दूसरे चार अन्य राज्य पंजाब, उत्तराखंड,गोवा,मणिपुर में होने वाले चुनावों में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा का चेहरा नहीं होंगे।

2022 में हिमाचल प्रदेश व गुजरात में भी चुनाव होने हैं। लेकिन ये चुनाव साल के अंत में हाेंगे।

यह फैसला पिछले सप्ताह दिल्ली में संपन्न राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की एक उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया है। इस बैठक में सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले भी मौजूद थे। उन्हीं के अगुवाई में संपन्न बैठक में निर्णय लिए गए हैं। दो दिन चली बैठक में सरसंघचालक सिर्फ एक दिन के लिए ही रहे।

संघ की इस बैठक में क्षेत्रीय मुख्यालयों के प्रभारी और अन्य जिम्मेदारियों पर भी निर्णय लिए गए हैं। फैसले में सबसे अहम है चुनाव तक सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले का मुख्यालय नागपुर के बजाय लखनऊ होगा।

सूत्रों का कहना है कि यूपी चुनाव का खाका तैयार करने से पहले बैठक में
पश्चिम बंगाल के चुनावों को लेकर गंभीर मंथन हुआ था।

मंथन में संघ ने माना कि पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में ममता बनाम मोदी की रणनीति से नुकसान हुआ। इसलिए इस बार रणनीति बदलने कर चुनाव लड़ने का फैसला लिया गया।

हालांकि अधिकृत तौर पर संघ इसकी पुष्टि नहीं कर रहा है लेकिन यदि सूत्राें की मानें ताे यूपी चुनाव कैसे लड़ा जाएगा इसका खाका करीब-करीब तैयार कर लिया गया है।

इस बार इसका चुनावी ताना-बाना प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी की जगह योगी आदित्यनाथ काे केंद्र में रख कर बुना गया है।

संघ की इस बैठक में अन्य कई महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए लेकिन सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय यह लिया गया
है कि अगले वर्ष यूपी सहित चार राज्यों में होने वाले चुनावों में अब नरेंद्र मोदी पार्टी का चेहरा नहीं होंगे।

संघ के मंथन का निष्कर्ष है कि क्षेत्रीय चुनाव, क्षेत्रीय नेताओं काे ही आगे कर लड़ना चाहिए। प्रधानमंत्री या किसी
अन्य केंद्रीय मंत्री के चेहरे को सामने रख चुनाव लड़ने का खामियाजा उठाना पड़ सकता है ।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद संघ ने यह साेच बदली है। बंगाल का चुनाव पार्टी ने प्रधानमंत्री माेदी के चेहरे पर लड़ा गया था, जिसका खामियाजा पार्टी काे करारी हार के रूप में उठाना पड़ा। इसलिए अब संघ काे अपनी रणनीति बदलनी पड़ी है।

इसलिए आगामी विधानसभा चनावों में
यूपी में पार्टी का चेहरा योगी आदित्यनाथ हाेंगे। उन्हीं के चेहरे पर पार्टी चुनाव लड़ेगी।

संघ के फैसले से यह साफ जाहिर होता है कि माेदी और योगी में मतभेद है। इसे एक और उदाहरण से समझा जा सकता है।

गत 5 जून काे योगी आदित्यनाथ का 49वां जन्मदिन था। लेकिन उनके जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा तीनों ने ही बधाई न देकर विवाद को हवा दे दी है।

राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी जैसे पार्टी के दूसरे बड़े नेताओं ने जरूर उनको बधाई दी पर पार्टी संगठन के तीन शीर्ष नेताओं ने बधाई नहीं दी। तीनों के ट्विटर हैंडल पर पर बधाई संदेश नहीं आया।

जब इसको लेकर विवाद शुरू हुए ताे सूत्रों के हवाले से एक सफाई आई, जिसमें कहा गया कि कोरोना वायरस के संक्रमण की दूसरी लहर शुरू होने के बाद
प्रधानमंत्री मोदी ने किसी को जन्मदिन की बधाई नहीं दी है।

हालांकि पिछले साल जून में भी कोरोना की लहर चल रही थी और तब प्रधानमंत्री ने योगी आदित्यनाथ को उनके जन्मदिन की बधाई दी थी।

उससे पहले 2019 में भी मोदी ने योगी
काे जन्मदिन पर बधाई दी थी। प्रधानमंत्री व गृह मंत्री ने विगत माह 27 मई को नितिन गडकरी को भी जन्मदिन की बधाई नहीं दी थी।

लेकिन गडकरी को लेकर न तो सवाल उठे, न ही तब पार्टी की तरफ से कोई
सफाई दी गई थी।

जबकि सच में ऐसा नहीं है कि काेराेना काल में माेदी ने किसी काे बधाई नहीं दी। पांच राज्यों के चुनाव के बाद उन्होंने उन राज्यों के नेताओं को कम से कम दो-दो बार बधाई दी। पहले जीत की और फिर शपथ लेने की।

प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा नहीं जीती वहां भी उन्होंने अच्छा वोट हासिल करने के लिए पार्टी नेताओं को बधाई दी। कैलेंडर के हिसाब से हर दिवस की बधाई भी उनकी टाइमलाइन पर देखी जा सकती है।

अमित शाह ने गत 27 मई को पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी को भी जन्मदिन की बधाई नहीं दी थी। लेकिन अमित शाह ने 18 मई को भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और सामाजिक अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत को ट्वीट करके जन्मदिन की बधाई दी थी।

अब बधाई न देने पर बीजेपी की लीपापोती से यह साफ है कि माेदी और योगी में ठन गई है। और इस युद्ध में योगी संघ की पसंद के मामले में, माेदी पर भारी पड़ रहे हैं। कम से कम उत्तर प्रदेश में तो योगी का झंडा अभी बुलंद रहेगा।

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