June 25, 2021

Tej Times News

Satyam Sarvada

कृषि आंदोलन : भारत सरकार चर्चा के लिए तैयार

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तोमर बातचीत को तैयार, कानून रद्द करने पर अड़े किसान संगठन

22 जनवरी तक 11 बैठकों के बाद भी कोई हल नहीं

किसानों की मांग : तीनों केंद्रीय कानूनों को पूरी तरह वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देने वाला नया कानून बने

सरकार का तर्क : संशोधन को तैयार, कानून वापसी संभव नहीं

नई दिल्ली। 26 जनवरी के नाटकीय घटनाक्रम के बाद से केंद्र और आंदोलनकारी किसानों रुकी हुई वार्ता पर पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार किसानों के साथ बातचीत फिर से शुरू करने के लिए तैयार है।

कृषि मंत्री ने कहा कि किसान संगठन तीनों नए कृषि कानूनों को रद्द करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देने वाले कानून की अपनी मांगों पर अपने मजबूत तर्क प्रस्तुत करें।

उधर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्षममता बनर्जी
तथा शिरोमणि अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि केंद्र सरकार किसानों के साथ बातचीत क्यों नहीं कर रही है। कांग्रेस ने भी प्रदर्शनकारी किसानों की मांग स्वीकार किए जाने की वकालत की है।

ज्ञातव्य है कि सरकार और किसान यूनियनों ने गतिरोध खत्म करने और किसानों के विरोध प्रदर्शन को समाप्त करने के लिए 11 दौर की बातचीत की है, जिसमें आखिरी वार्ता 22 जनवरी को हुई थी।

26 जनवरी के नाटकीय घटनाक्रम बाद से सरकार द्वारा कृषि कानून को वापस लेने पर अड़े किसान आंदोलन के बड़े नेताओं से कोई बातचीत नहीं हुई है।

मंत्रिमंडल की ब्रीफिंग में तोमर ने कहा, जब भी किसान चर्चा चाहेंगे, भारत सरकार चर्चा के लिए तैयार रहेगी। लेकिन हमने बार-बार उनसे तर्क के साथ प्रावधानों संबंधी आपत्तियों पर अपनी बात रखने को कहा है।

लेकिन किसान संगठनों ने दावा किया कि सरकार का कदम अनुचित और तर्कहीन है। संयुक्त किसान मोर्चा ने एक बयान में कहा, प्रदर्शनकारी किसान एक बार फिर इस बात को दोहराते हैं कि सरकार का रवैया अनुचित और तर्कहीन है। किसान तीनों केंद्रीय कानूनों को पूरी तरह वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देने वाला नया कानून लाने की मांग करते रहे हैं।

बनर्जी ने तीनों नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के समर्थन में विपक्ष शासित राज्यों को एकजुट करने का वादा करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य सत्ता से नरेंद्र मोदी सरकार को हटाना है। कांग्रेस ने भी इस मामले में हमला तेज कर दिया।

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने तोमर के बयान को लेकर कहा, किसान को भीख नहीं, न्याय चाहिए। किसान को अहंकार नहीं, अधिकार चाहिए। घमंड के सिंहासन से उतरिए, राजहठ छोड़िए, तीनों काले क़ानून ख़त्म करना ही एकमात्र रास्ता है।

राहुल गांधी ने किया ट्विट
राहुल गांधी ने आंदोलन के दौरान 500 किसानों की मौत होने के दावे वाले हैशटैग के साथ ट्वीट किया, खेत-देश की रक्षा में तिल-तिल मरे हैं किसान, पर ना डरे हैं किसान, आज भी खरे हैं किसान।

कृषि कानून निरस्त करे सरकार
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने तोमर से केन्द्र के कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों से बिना शर्त वार्ता करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगों को खारिज कर उनके घावों पर नमक छिडक़ने के बजाय कृषि मंत्री को उनसे बिना शर्त बातचीत करनी चाहिए।

इन किसानों को आशंका है कि नए कृषि कानूनों के अमल में आने से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की सरकारी खरीद समाप्त हो जाएगी। उच्चतम न्यायालय ने तीनों कृषि कानूनों के क्रियान्वयन पर अगले आदेश तक रोक लगा रखी है और समाधान खोजने के लिए एक समिति का गठन किया है।

तोमर ने कहा, देश के सभी राजनीतिक दल इन कृषि कानूनों को लाना चाहते थे, लेकिन उन्हें लाने का साहस नहीं जुटा सके। मोदी सरकार ने किसानों के हित में यह बड़ा कदम उठाया और सुधार लाए। देश के कई हिस्सों में किसानों को इसका लाभ मिलने लगा।

तोमर और खाद्य मंत्री पीयूष गोयल ने की बात
तोमर और खाद्य मंत्री पीयूष गोयल समेत तीन केंद्रीय मंत्रियों ने प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों के साथ 11 दौर की बातचीत की थी। इस तरह की 22 जनवरी को हुई पिछली बैठक में, सरकार ने 41 किसान समूहों के साथ बातचीत की जिसमें गतिरोध उत्पन्न हुआ क्योंकि किसान संगठनों ने कानूनों को निलंबित करने के केंद्र के प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिज कर दिया।

किसान यूनियन में फूट
भारतीय किसान यूनियन (मान) के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान ने शीर्ष अदालत द्वारा नियुक्त समिति से खुद को अलग कर लिया था। शेतकरी संगठन (महाराष्ट्र) के अध्यक्ष अनिल घनवत, कृषि अर्थशास्त्री प्रमोद कुमार जोशी तथा अशोक गुलाटी समिति के अन्य सदस्य हैं।

किसान नेता शिव कुमार कक्का ने कहा, हमारी मुख्य मांग हमेशा से ही तीनों कानूनों को वापस लेने और एमएसपी पर लिखित आश्वासन देने की रही है। ये ही मुख्य मुद्दे हैं और इसलिए हम प्रदर्शन कर रहे हैं और करते रहेंगे। हम 2024 तक इसे जारी रखने के लिए तैयार हैं।

हमने 555 से ज्यादा किसानों की कुर्बानी दी है और छह महीने से अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे हैं, इसलिए कृषि मंत्री का आज का बयान अजीबोगरीब और गैरजिम्मेदाराना है।

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