April 18, 2021

Tej Times News

Satyam Sarvada

होमियोपैथी : प्रोस्टेट ग्लैंड की वृद्धि से छुटकारा

यदि आप प्रोस्टेट ग्लैंड की वृद्धि से होने वाली समस्याओं से परेशान हैं तो चिंतित होने की जरूरत नहीं है क्योंकि होम्योपैथी में अनेक कारगर दवाइयाँ उपलब्ध हैं जो आपको इन समस्याओं से छुटकारा दिला सकती हैं। यह जानकारी केंद्रीय होम्योपैथी परिषद के पूर्व सदस्य एवँ वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ अनुरूद्ध वर्मा ने होम्योपैथी जागरूकता अभियान के अन्तर्गत दी है। उन्होंने बताया कि यह समस्या की संभावना 50 वर्ष के उम्र के बाद कभी भी हो सकती है परंतु 75 वर्ष आयु के लगभग 50 प्रतिशत वृद्धों की इस समस्या से सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि प्रोस्टेट ग्रंथि की वृद्धि में बार -बार पेशाब होना विशेष रूप से रात में, मूत्र त्यागने में जल्द बाजी,पेशाब करने के बाद बूँद बूँद कर पेशाब निकलना, पेशाब की धार न बनना, पेशाब करते समय दर्द, ज्यादा जोर लगाने के बाद भी कम पेशाब होना, पेशाब में जलन, एवँ कब्ज आदि के लक्षण हो सकते हैं । उन्होंने बताया कि यदि समय से उपचार न किया जाए तो मूत्र मार्ग में संक्रमण, पेशाब करने में परेशानी, रात एवँ दिन में बार- बार पेशाब होना, तीव्र मूत्रावरोध, पेशाब से खून, प्रोस्टेट कैंसर आदि की जटिलताएँ हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि इसका एलोपैथी में मात्र ऑपरेशन की समाधान है वहीं पर होम्योपैथी में प्रोस्टेट ग्रंथि की वॄद्धि की समस्याओं का समाधान बिना ऑपरेशन के केवल दवाईओं से ही संभव है। उन्होंने बताया कि होम्योपैथिक दवाइयाँ रोगी के व्यक्तिगत लक्षणों, मानसिक लक्षणों, आचार, विचार, व्यवहार आदि के आधार पर दी जाती हैं। उन्होंने बताया कि होम्योपैथिक दवाइयाँ रोगी के शरीर पर किसी तरह का दुष्प्रभाव नहीं डालती हैं और पूरी तरह निरापद हैं। डॉ वर्मा ने बताया कि प्रोस्टेट ग्रंथि की वृद्धि के उपचार में प्रयुक्त होने वाली औषधियों में थूजा, कोनियम, बेराइटा कार्ब, चिमाफिला, फेरम पिक्रिक, लाइकोपोडियम, एपिस मेल, सैबाल शैरोलेटा ,पिक्रिक एसिड आदि प्रमुख हैं परंतु इनका प्रयोग प्रशक्षित चिकित्सक की सलाह पर ही करना है। उन्होंने बताया कि प्रोस्टेट ग्रन्थि की वॄद्धि के संबंध में मोबाइल नंबर 9415075558 पर परामर्श प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने सलाह दी कि इस तरह का कोई भी लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सक से सलाह लेनी होगी।