April 18, 2021

Tej Times News

Satyam Sarvada

किस “दिशा” में जा रही हमारी सरकार

बात चाहे कील कांटों की हो, या फिर किसानों की मौत की या फिर दिशा रवि की गिरफ्तारी की, सवाल एक ही है कि किस दिशा में जा रही हमारी लोकप्रिय मोदी सरकार।

लोकप्रियता का पैमाने बदल गए हैं, आजकल लोकप्रियता तय होती है चुनावी समर में विजय या पराजय से।

लोकप्रियता का दूसरा मापदंड भी पूंजी नियंत्रण में आ चुका है, यानि जिस साइबर आर्मी की बात दिल्ली के विधानसभा चुनाव की एक सभा में गृहमंत्री अमित शाह ने स्वीकारोक्ति में कही थी, कि जब जब भाजपा पर कोई संकट आता है, तब तब संकटमोचक बन जाती है साइबर आर्मी।

अब मामला यह है कि साइबर आर्मी काम कैसे करती है?

साइबर आर्मी का सबसे बड़ा टूल है, फर्जी अकाउंट्स।

परन्तु यह सब एकदम गोपनीय तरीके से किया जाने वाला सुसंगठित कार्य है। कोई भी अफवाह या हवा फैलाने के लिए इन अकाउंट्स और आर्मी का प्रयोग किया जाता है और किसी भी मुद्दे पर इच्छानुकूल कमेंट न आने पर अपशब्दों की बौछार कर, कमेंट करने वाले को इतना हतोत्साहित किया जाता है कि वह काफी समय के लिए या तो सोशल मीडिया की और रुख ही न करे और यदि करे भी तो विरोध में बोलने की हिम्मत भी न करे।

देखा जाए तो सोशल मीडिया अभिव्यक्ति के बड़े हथियार के रूप में विकसित हो चुका है, परंतु इस पर भी कई तरह के गुट विकसित हो गए हैं, जिन्हें आप सोशल मीडिया आर्मी भी कह सकते हैं।

परन्तु जिस तरह भ्रामक प्रचार और सही को गलत साबित करने की होड़ ने यह सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या इस पर कोई रोक लगाई जानी चाहिए अथवा नहीं?

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट को एडिट कर के डालने के जुर्म में 21 वर्ष की दिशा को गिरफ्तार कर रिमांड पर लेने से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन का मामला बनता है, जब तक यह सिद्ध न हो जाए कि यह कोई सुसंगठित या सुनियोजित अपराध था।

सरकार को ऐसे मामलों में संवेदनशीलता का प्रदर्शन करना चाहिए। गोपनीय जांच करके पुष्टि होने पर ही गिरफ्तारी को अंजाम देना चाहिए।